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तुलसी • अध्याय 1 • श्लोक 15
तुलसीदारुमणिभिः जपः सर्वार्थसाधकः । एवं न वेद यः कश्चित् स विप्रः श्वपचाधमः ।।
तुलसी के मनकों को माला समस्त मनोकामनाओं को पूरा करने वाली है। इस प्रकार जो ब्राह्मण नहीं जानता, वह चाण्डाल से भी अधम है।
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