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त्रिपुरा • अध्याय 1 • श्लोक 3
नवयोनिर्नवचक्राणि दधिरे नवैव योगा नव योगिन्यश्च । नवानां चक्रा अधिनाथाः स्योना नव मुद्रा नव भद्रा महीनाम् ॥
वह चैतन्य शक्ति नव योनि, नवचक्र, नवयोग, नवयोगिनी, नवचक्रों की आधार शक्तियों, सुखकारी नवभद्राओं तथा महिमाशालिनी नव मुद्राओं के रूप में प्रकाशित हो रही है।
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