तीन पुर, तीन पथ एवं इस (श्री चक्र) में सन्निविष्ट अकथादि अक्षरक्रोध इन सभी से अधिष्ठित यह (शक्ति) सबको समान दृष्टि से देखने वाली जो अजर, प्राचीन चैतन्य शक्ति है, वह अपनी महिमा से अत्यधिक श्रेष्ठ है।
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