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तत्त्वबोध • अध्याय 1 • श्लोक 9
स्थूलशरीरं किम्? पञ्चीकृतपञ्चमहाभूतैः कृतं सत्कर्मजन्यं सुखदुःखादिभोगायतनं शरीरम् अस्ति जायते वर्धते विपरिणमते अपक्षीयते विनश्यतीति षड्विकारवदेतत्स्थूलशरीरम्।
प्रश्न: स्थूल शरीर क्या है? उत्तर: पञ्चीकृत पञ्चमहाभूतों से बना हुआ, सत्कर्मों से प्राप्त, तथा सुख-दुःख आदि भोगों का आश्रय जो शरीर है, वही स्थूल शरीर कहलाता है। यह छः विकारों से युक्त होता है — अस्ति (अस्तित्व में रहता है), जायते (जन्म लेता है), वर्धते (बढ़ता है), विपरिणमते (परिवर्तन को प्राप्त होता है), अपक्षीयते (क्षीण होता है) और विनश्यति (नष्ट हो जाता है)। यही स्थूल शरीर है।
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