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तत्त्वबोध • अध्याय 1 • श्लोक 6
शमादिसाधनसम्पत्तिः का? शमो दम उपरमस्तितिक्षा श्रद्धा समाधानं च इति। शमः कः? मनोनिग्रहः। दमः कः? चक्षुरादिबाह्येन्द्रियनिग्रहः। उपरमः कः? स्वधर्मानुष्ठानमेव। तितिक्षा का? शीतोष्णसुखदुःखादिसहिष्णुत्वम्। श्रद्धा कीदृशी? गुरुवेदान्तवाक्यादिषु विश्वासः श्रद्धा। समाधानं किम्? चित्तैकाग्रता।
शम से शुरू होने वाला आंतरिक धन क्या है? वे हैं शम, दम, उपराम, तितिक्षा, श्रद्धा और समाधान। शम क्या है? यह मन पर नियंत्रण या महारत है। दम क्या है ? यह बाहरी इन्द्रियों जैसे आँखें आदि का नियंत्रण है। उपराम या उपरति क्या है? यह अपने धर्म (कर्तव्य) का सख्ती से पालन है। तितिक्षा क्या है? यह सर्दी-गर्मी, सुख-दुःख आदि की सहनशीलता है। श्राद्ध का स्वरूप क्या है? गुरु और वेदांत के वचन आदि में विश्वास ही श्राद्ध है। समाधान क्या है? यह मन की एकल तीक्ष्णता है।
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