मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
तत्त्वबोध • अध्याय 1 • श्लोक 37
ज्ञानोत्पत्त्यनन्तरं ज्ञानिदेहकृतं पुण्यपापरूपं कर्म यदस्ति तदागामीत्यभिधीयते ।
ज्ञान की सुबह के बाद ज्ञानी आत्मा के शरीर द्वारा किए गए अच्छे या बुरे कर्मों के परिणाम को अगामी के रूप में जाना जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
तत्त्वबोध के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

तत्त्वबोध के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें