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तत्त्वबोध • अध्याय 1 • श्लोक 36
कर्माणि कतिविधानि सन्तीति चेत् आगामिसञ्चितप्रारब्धभेदेन त्रिविधानि सन्ति ।
यदि किसी से पूछा जाए कि कर्म कितने प्रकार के होते हैं, तो (उत्तर है) कर्म तीन प्रकार के होते हैं - अगामी, संचित और प्रारब्ध।
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