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तत्त्वबोध • अध्याय 1 • श्लोक 32
एतेषां पञ्चतत्त्वानां तामसांशात् पञ्चीकृतपञ्चतत्त्वानि भवन्ति। पञ्चीकरणं कथम् इति चेत्। एतेषां पञ्चमहाभूतानां तामसांशस्वरूपम् एकमेकं भूतं द्विधा विभज्य एकमेकमर्धं पृथक् तूष्णीं व्यवस्थाप्य अपरमपरमर्धं चतुर्धां विभज्य स्वार्धमन्येषु अर्धेषु स्वभागचतुष्टयसंयोजनं कार्यम्। तदा पञ्चीकरणं भवति। एतेभ्यः पञ्चीकृतपञ्चमहाभूतेभ्यः स्थूलशरीरं भवति। एवं पिण्डब्रह्माण्डयोरैक्यं सम्भूतम्।
इन पाँच तत्त्वों के तामस अंश से पञ्चीकृत पञ्चमहाभूत उत्पन्न होते हैं। पञ्चीकरण कैसे होता है? इन पाँच महाभूतों के तामस अंश वाले प्रत्येक भूत को दो भागों में विभाजित किया जाता है। उनमें से एक आधा भाग अलग रखा जाता है। दूसरे आधे भाग को पुनः चार भागों में विभाजित किया जाता है। फिर प्रत्येक भूत के आधे भाग में अन्य चार भूतों के एक-एक चौथाई भाग का मिश्रण किया जाता है। इस प्रकार पञ्चीकरण की प्रक्रिया पूर्ण होती है। इन पञ्चीकृत पञ्चमहाभूतों से स्थूल शरीर की उत्पत्ति होती है। इस प्रकार पिण्ड (व्यष्टि) और ब्रह्माण्ड (समष्टि) की एकता स्थापित होती है।
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