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तत्त्वबोध • अध्याय 1 • श्लोक 31
एतेषां पञ्चतत्त्वानां मध्ये आकाशस्य राजसांशात् वागिन्द्रियं सम्भूतम्। वायोः राजसांशात् पाणीन्द्रियं सम्भूतम्। वन्हेः राजसांशात् पादेन्द्रियं सम्भूतम्। जलस्य राजसांशात् उपस्थेन्द्रियं सम्भूतम्। पृथिव्या राजसांशात् गुदेन्द्रियं सम्भूतम्। एतेषां समष्टिराजसांशात् पञ्चप्राणाः सम्भूताः।
इन पाँच तत्त्वों में से आकाश के राजस अंश से वागिन्द्रिय (वाणी) उत्पन्न हुई। वायु के राजस अंश से पाणीन्द्रिय (हाथ) उत्पन्न हुई। अग्नि के राजस अंश से पादेन्द्रिय (पैर) उत्पन्न हुई। जल के राजस अंश से उपस्थेन्द्रिय उत्पन्न हुई। पृथ्वी के राजस अंश से गुदेन्द्रिय उत्पन्न हुई। इन पाँच तत्त्वों के समष्टि राजस अंश से पाँच प्राण उत्पन्न हुए।
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