मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
तत्त्वबोध • अध्याय 1 • श्लोक 29
एतेषां पञ्चतत्त्वानां मध्ये आकाशस्य सात्विकांशात् श्रोत्रेन्द्रियं सम्भूतम्। वायोः सात्विकांशात् त्वगिन्द्रियं सम्भूतम्। अग्नेः सात्विकांशात् चक्षुरिन्द्रियं सम्भूतम्। जलस्य सात्विकांशात् रसनेन्द्रियं सम्भूतम्। पृथिव्याः सात्विकांशात् घ्राणेन्द्रियं सम्भूतम्।
इन पाँच तत्त्वों में से आकाश के सात्त्विक अंश से श्रवणेन्द्रिय उत्पन्न हुई। वायु के सात्त्विक अंश से स्पर्शेन्द्रिय उत्पन्न हुई। अग्नि के सात्त्विक अंश से दृष्टीन्द्रिय उत्पन्न हुई। जल के सात्त्विक अंश से रसनेन्द्रिय उत्पन्न हुई। तथा पृथ्वी के सात्त्विक अंश से घ्राणेन्द्रिय उत्पन्न हुई।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
तत्त्वबोध के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

तत्त्वबोध के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें