फिर स्वयं क्या है?
यह अस्तित्व, चेतना, आनंद की प्रकृति का है।
अस्तित्व क्या है?
जो तीन कालों (भूत, वर्तमान और भविष्य) में अपरिवर्तित रहता है वह अस्तित्व है।
चेतना क्या है?
यह पूर्ण ज्ञान की प्रकृति का है।
आनंद क्या है?
यह परम सुख की प्रकृति का है। इस प्रकार व्यक्ति को स्वयं को अस्तित्व-चेतना-आनंद की प्रकृति का जानना चाहिए।
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