मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
तत्त्वबोध • अध्याय 1 • श्लोक 24
मदीयं शरीरं मदीयाः प्राणाः मदीयं मनश्च मदीया बुद्धिर्मदीयं अज्ञानमिति स्वेनैव ज्ञायते तद्यथा मदीयत्वेन ज्ञातं कटककुण्डल गृहादिकं स्वस्माद्भिन्नं तथा पञ्चकोशादिकं स्वस्माद्भिन्नम् मदीयत्वेन ज्ञातमात्मा न भवति॥
प्रश्न: आत्मा पाँच कोशों से भिन्न कैसे है? उत्तर: "मेरा शरीर", "मेरे प्राण", "मेरा मन", "मेरी बुद्धि" और "मेरा अज्ञान" — ये सब अपने से भिन्न होने के कारण जाने जाते हैं। जिस प्रकार कंगन, कुण्डल, घर आदि वस्तुएँ "मेरी" कहकर अपने से भिन्न जानी जाती हैं, उसी प्रकार पाँच कोश आदि भी "मेरे" के रूप में जाने जाने के कारण आत्मा नहीं हैं, बल्कि आत्मा से भिन्न हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
तत्त्वबोध के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

तत्त्वबोध के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें