जिस प्रकार चूड़ी, कुण्डली, घर आदि 'मेरा' कहलाने वाले 'मैं' से भिन्न सब हैं, उसी प्रकार पाँच कोश आदि मेरे शरीर, मेरे प्राण, मेरे मन, मेरी बुद्धि के नाम से जाने जाते हैं। और मेरा ज्ञान और इसलिए स्वयं नहीं हैं।
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