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तत्त्वबोध • अध्याय 1 • श्लोक 17
अतः सुषुप्त्यवस्था का? अहं किमपि न जानामि सुखेन मया निद्राऽनुभूयत इति सुषुप्त्यवस्था। कारणशरीराभिमानी आत्मा प्राज्ञ इत्युच्यते।
प्रश्न: सुषुप्ति अवस्था क्या है? उत्तर: जिस अवस्था के विषय में जागने पर यह अनुभव होता है कि — "मैं कुछ भी नहीं जानता था और मैंने सुखपूर्वक निद्रा का अनुभव किया" — वह सुषुप्ति अवस्था कहलाती है। कारण शरीर का अभिमान करने वाला आत्मा प्राज्ञ कहलाता है।
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