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तत्त्वबोध • अध्याय 1 • श्लोक 16
स्वप्नावस्था केति चेत्? जाग्रदवस्थायां यद्दृष्टं यद् श्रुतम् तज्जनितवासनया निद्रासमये यः प्रपञ्चः प्रतीयते सा स्वप्नावस्था। सूक्ष्मशरीराभिमानी आत्मा तैजस इत्युच्यते।
प्रश्न: स्वप्न अवस्था क्या है? उत्तर: जाग्रत अवस्था में जो देखा और सुना गया है, उससे उत्पन्न वासना के कारण, निद्रा के समय जो प्रपञ्च प्रतीत होता है, वह स्वप्न अवस्था कहलाती है। सूक्ष्म शरीर का अभिमान करने वाला आत्मा तैजस कहलाता है।
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