जो अकथनीय है, अनादि है, अज्ञान के रूप में है, दो शरीर (स्थूल और सूक्ष्म) का एकमात्र कारण है, अपने स्वयं के वास्तविक स्वरूप से अनभिज्ञ, द्वैत से मुक्त - कारण शरीर है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
तत्त्वबोध के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
तत्त्वबोध के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।