कर्म की पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ हैं - वाणी, हाथ, पैर, गुदा और जननेंद्रिय। कर्मेन्द्रियों के अधिष्ठाता देवता हैं - वाणी की अग्नि, हाथों के इन्द्र, पैरों के विष्णु, गुदा के यम और जननेंद्रिय के प्रजापति।
- वाणी का काम बोलना है
- हाथों का काम पकड़ना है
- पैरों का चलना है
- गुदा का काम है मल और
- जननेन्द्रिय का निष्कासन, सुख (संपत्ति)
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