शुक्र का (वक्री होने पर) नीचासन्न में बड़ा बिम्ब होता है, इसलिये पश्चिम में ८ अस्तकालांश और पूर्व में ८ उदय कालांश होता हैं। छोटे बिम्ब के कारण पूर्व में १० कालांशों से अस्त और पश्चिम में १० कालांशों से उदय होता है।
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