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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 9 • श्लोक 6
उदयास्तयोरुपलब्धकालांशा: एकादशामरेज्यस्य तिथिसंख्याडर्कजस्य च । अस्तांशा भूमिपुत्रस्य दश सप्ताउधिकास्तत: ।।
बृहस्पति के ११ शनि के १५ तथा मंगल के १७ कालांश होते हैं। (सूर्य से अपने-अपने कालांशों के तुल्य अन्तरित होने पर ग्रह उदय-अस्त होते हैं।)
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