पूर्वोदयास्तसाधन करना हो तो सूर्य और दृग्ग्रह के “भोग्यासूनूनकस्याथ भुक्तासूनधिकस्य च” इत्यादि प्रकार से अन्तरासुओं का साधन कर तथा पश्चिमोदयास्तसाधन करना हो तो छ: राशियुत सूर्य और छ: राशियुत दूृग्ग्रह के अन्तरासुओं का साधन कर इन अन्तरासुओं में ६० का भाग देने से जो लब्धि प्राप्त हो उसे इष्टकालांश कहते हैं।
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