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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 9 • श्लोक 4
कालांशे इतिकर्त्तव्यताम्‌ सूर्यास्तकालिकौ पश्चात्‌ प्राच्यामुदयकालिकौ । दिवा चार्कग्रहौ कुर्याद्‌ दृक्‍कर्माथ ग्रहस्य तु ॥
पश्चिम दिशा में ग्रहों का उदयास्त साधन करना हो तो सूर्यास्तकालिक, पूर्वदिशा में उदयास्त साधन करना हो तो सूर्योदय कालिक तथा दिन में इष्ट कालिक सूर्य और ग्रह का साधन करना चाहिये। तदनन्तर ग्रह में आयन और आशक्षदृक्कर्म का संस्कार करना चाहिये।
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