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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 9 • श्लोक 18
सदोदित नक्षत्राणि अभिजिद्‌ ब्रह्महदर्यस्वातिवैष्णववासवा: । अहिर्ड॒ुघ्न्यमुदकस्थत्वान्न लुप्यन्तेडकरश्मिभि: ॥ ॥ सूर्यसिद्धान्ते उदयास्ताधिकार: सम्पूर्ण: ॥
अभिजित्‌, ब्रह्महदय, स्वाती, श्रवण, धनिष्ठा तथा उत्तराभाद्रपदा का उत्तर शर अधिक है इसलिए ये कभी भी अस्त नहीं होते।
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