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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 9 • श्लोक 16
प्रकारान्तरेणोदयास्त साधनम्‌ अष्टादशशताभ्यस्ता दृश्यांशा: स्वोदयासुभि: । विभज्य लब्धा: क्षेत्रांशास्तैर्दश्याउदृश्यताउथवा ।।
नक्षत्र और ताराओं के पूर्वोक्त कालांशों को १८०० से गुणाकर ग्रह की राशि के उदयासुओं से भाग देने पर भागफल उन नक्षत्र और तारों के क्षेत्रांश अर्थात्‌ क्रान्तिवृत्ततत अंश होते हैं। उनसे ग्रहों की तरह नक्षत्र और तारों का भी उदय-अस्त साधन पूर्वोक्तरीति से करना चाहिए।
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