कृत्तिकामैत्रमूलानि सार्प रीद्रकक्षमेव च ।
दृश्यन्ते पञ्चदशभिराषाढाद्वितवं तथा ॥
कृत्तिका, अनुराधा, मूल, आश्लेषा, आर्द्रा, पूर्वाषाढ़ा तथा उत्तराषाढ़ा के १५ कालांश,
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