सूर्य और इष्टग्रह की कलात्मक गतियों को ग्रह्धिष्ठित राशि के लग्नोदयासुओं से पृथक्-पृथक् गुणाकर १८०० का भाग दें, लब्ध फल क्रम से सूर्य और ग्रह की कालगति होती हैं। इन कालगतियों से पूर्वोक्त प्रकार से पूर्वोक्त कालांशों के अन्तर द्वारा उठदय और अस्तकाल के गत-गम्य दिनादि का साधन करना चाहिए।
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