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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 9 • श्लोक 10
ग्रहोदयास्तयोगतगम्य दिनादय: तत्कालांशान्तररकला भुकक्‍्त्यन्तरविभाजिता: । दिनादि तत्फल लब्धं भुक्तियोगेन वक्रिण: ॥
पाठपठित कालांश और इष्टकालांशों की अन्तर कलाओं में सूर्य और ग्रह की (वशक्ष्यमाण) कालगति की अन्तर कला का तथा वक्री ग्रह हो तो गतियोगकला का भाग देने से लब्ध फल गत-गम्य दिनादि होते हैं।
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