सूर्य की किरणों से आक्रान्त अल्प तेजवाले ज्योतिष्पिण्डों के उदय एवं अस्त कालज्ञान का विवेचन कर रहा हूँ। (अपनी-अपनी गति से भ्रमण करते हुए चन्द्र आदि ग्रह और नक्षत्रों का जब सूर्य से सान्निध्य होता है तब उनका सूर्यकिरणों में निमग्न होने के कारण दीखना बन्द हो जाता है इसी को अस्त कहते हैं तथा जब सूर्य से दूर हटकर दिखलाई देने लगते हैं तब उसे उदय कहते हैं)।
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