इसी प्रकार सम्पूर्ण नक्षत्रों की धुवकला साधन कर ऊपर दी गई हैं। यहाँ भगवान् सूर्य ने पाठ में लाघव के लिए सब नक्षत्रों की भोगकला ही पढ़ी हैं।
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