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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 8 • श्लोक 21
अपांवत्सस्तु चित्राया उत्तरेंडशैस्तु पञ्चभि: । बृहत्‌ किज्चिदतो भागैराप: षड्भिस्तथोत्तरे ॥ ॥ सूर्यसिद्धान्ते नक्षत्रग्रहयुत्यधिकार: सम्पूर्ण: ॥
चित्रा नक्षत्र से ५ अंश उत्तर की ओर अपांवत्स की तारा है। अर्थात्‌ अपांवत्स का भ्रुवक ६ राशि और अपने क्रान्त्यग्र से ३ अंश उत्तर शर है। अपांवत्स से कुछ दूरी पर स्थूलतारात्मक आपसंज्ञक ६ अंश उत्तर दिशा में स्थित है। अर्थात्‌ आप संज्ञक तारा का ध्रुवक १८० अंश और उत्तर शर ६ अंश है।
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