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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 8 • श्लोक 19
रोहिण्यादित्यमूलानां प्राची सार्पस्य चैव हि । यथा प्रत्यवशेषाणां स्थूला स्याद्योगतारका ॥
रोहिणी, पुनर्वसु, मूल और आश्लेषा इनके पूर्व दिशा में स्थित तारा योगतारा है। शेष नक्षत्रों की स्थूल अर्थात्‌ बड़ी और कान्तिमती (प्रकाशमान) त्मरा योग तारा कही जाती है।
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