मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
सूर्य सिद्धांत • अध्याय 8 • श्लोक 1
नक्षत्राणां ध्रुवानयनम्‌ प्रोच्यन्ते लिप्तिकाभानां स्वभोगोड्थ दशाहत:। भवन्त्यतीत्यधिष्ण्यानां भोगलिप्तायुता ध्रुवा: ॥
(उत्तराषाढ़ा अभिजित्‌ श्रवण और धनिष्ठा को छोड़कर शेष) अश्विन्यादि नक्षत्रों की वक्ष्य्माण भोगकलाओं को १० से गुणाकर अश्वन्यादि गत नक्षत्रों की भोग कलाओं को जोड़ने से अश्वन्यादि नक्षत्रों के ध्रुव होते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सूर्य सिद्धांत के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

सूर्य सिद्धांत के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें