(उत्तराषाढ़ा अभिजित् श्रवण और धनिष्ठा को छोड़कर शेष) अश्विन्यादि नक्षत्रों की वक्ष्य्माण भोगकलाओं को १० से गुणाकर अश्वन्यादि गत नक्षत्रों की भोग कलाओं को जोड़ने से अश्वन्यादि नक्षत्रों के ध्रुव होते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सूर्य सिद्धांत के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
सूर्य सिद्धांत के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।