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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 7 • श्लोक 9
लब्धं प्राच्यामृर्ण सौम्ये विक्षेपे पश्चिमे धनम्‌ । दक्षिणे प्राक्कपाले स्व पश्चिमे तु विपर्यय: ॥
लब्ध कलादि फल को ग्रहों में धन, ऋण करें अर्थात्‌ उत्तर शर हो तो पूर्वकपाल में ऋण और पश्चिमकपाल में धन, तथा दक्षिण शर हो तो पूर्वकपाल में धन और पश्चिमकपाल में ऋण।
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