लब्ध कलादि फल को ग्रहों में धन, ऋण करें अर्थात् उत्तर शर हो तो पूर्वकपाल में ऋण और पश्चिमकपाल में धन, तथा दक्षिण शर हो तो पूर्वकपाल में धन और पश्चिमकपाल में ऋण।
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