दृक्कर्मसाधनम्
विषुवच्छाययाभ्यस्ताद् विक्षेपाद् द्वादशोद्धृूतात् ।
फल स्वनतनाडीघ्न॑ स्वदिनार्धविभाजितम् ॥
पलभा को शर से गुणाकर १२ का भाग देने से जो फल प्राप्त हो उसे अपनी अपनी नत घटी से गुणाकर अपने अपने दिनार्ध से भाग दें यंदि रात्रि में नतोन्नतकाल हो तो रात्र्यर्ध से भाग दे।
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