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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 7 • श्लोक 6
समलिप्तो भवेतां तौ ग्रहों भगणसंस्थितौ । विवर तद्ठदुद्धृत्यः दिनादि फलमिष्यते ॥
इष्टकालिक युति सम्बन्धि ग्रहों के अन्तर में उन दोनों ग्रहों के गत्यन्तर का भाग देने से गत युति में गत तथा गम्ययुति में एष्य दिनादि होते हैं।
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