मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
सूर्य सिद्धांत • अध्याय 7 • श्लोक 4
भुक्त्यन्रेण विभजेदनुलोमविलोमयो: । द्रयोर्वक्रिण्यथेकस्मिन्‌ भुक्तियोगेन भाजयेत्‌ ।।
जो लब्धि प्राप्त हो उसे गतयोग हो तो मार्गी ग्रहों में हीन और वक्री ग्रहों में युत करें। एष्य युति हो तो मार्गी ग्रहों में युत और वक्री ग्रहों में हीन करें। यदि एक ग्रह वक्री और एक ग्रह मार्गी हो तो स्व-स्वफल को युत-हीन करें। अर्थात्‌ गतयोग होने पर मार्गी ग्रह में अपना फल हीन और कक्री ग्रह में युक्त करें।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सूर्य सिद्धांत के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

सूर्य सिद्धांत के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें