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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 7 • श्लोक 21
जयी ग्रहस्य लक्षणम्‌ रुक्षो विवर्णो विध्वस्तो विजितो दक्षिणाश्रित: । उदकस्थो दीप्तिमान्‌ स्थूलो जयी याम्येडपि यो बली ।।
दूसरे ग्रह की अपेक्षा उत्तर दिशा में स्थित, दीप्तिमान्‌, बृहद्‌ बिम्बवाला ग्रह जयी होता है। दक्षिण दिशा में भी बलवान्‌ अर्थात्‌ जिस ग्रह का बिम्ब दीप्तिमान्‌ और बड़ा हो वह ग्रह जयी होता है।
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