युति सम्बन्धि ग्रहों को देखने के लिये काष्ठादिनिर्मित पाँच हाथ लम्बे दो शंकुओं को, जिस दिशा में ग्रह भ्रमण करते हों, उस दिशा में ग्रहों के याम्योत्तर अन्तर के तुल्य अन्तरित एक दो हाथ गहरे गर्त में दृढ़ता से स्थापित करना चाहिए।
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