मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
सूर्य सिद्धांत • अध्याय 7 • श्लोक 16
युतिकाले ग्रहयोदर्शनम्‌ पञ्चहस्तोच्छितौ शड्कू यथा दिग्भ्रमसंस्थितौ । ग्रहान्तररेण विक्षिप्तावधो हस्तनिखातगौं ॥
युति सम्बन्धि ग्रहों को देखने के लिये काष्ठादिनिर्मित पाँच हाथ लम्बे दो शंकुओं को, जिस दिशा में ग्रह भ्रमण करते हों, उस दिशा में ग्रहों के याम्योत्तर अन्तर के तुल्य अन्तरित एक दो हाथ गहरे गर्त में दृढ़ता से स्थापित करना चाहिए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सूर्य सिद्धांत के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

सूर्य सिद्धांत के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें