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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 7 • श्लोक 14
युतिदर्शन प्रकार: छायाभूमौ विपर्यस्ते स्वच्छायाग्रे तु दर्येत्‌ । ग्रह: स्वदर्पणान्त:स्थ: शड्क्‍्वग्रे सम्प्रदूश्यते ॥
समतल भूमि में ग्रह से विलोमदिशा में पड़ी हुई ग्रह की छाया के अग्रभाग में स्थापित किये गए दर्पण में स्थित ग्रह को गणक दिखलावे। वह आकाश में दिक्सम्पात में स्थित शंकु के अग्र में दीखता है।
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