समतल भूमि में ग्रह से विलोमदिशा में पड़ी हुई ग्रह की छाया के अग्रभाग में स्थापित किये गए दर्पण में स्थित ग्रह को गणक दिखलावे। वह आकाश में दिक्सम्पात में स्थित शंकु के अग्र में दीखता है।
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