मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
सूर्य सिद्धांत • अध्याय 7 • श्लोक 10
आयनदृक्कर्म साधनम्‌ सत्रिभग्रहजक्रान्ति-भागघ्ना: क्षेपलिप्तिका: । विकला: स्वमृणं क्रान्तिक्षेपयोर्भिन्नतुल्ययो: ॥
पूर्व साधित शरकला को सत्रिभग्रह के क्रान्त्यंश से गुणा करने से आयनदूक्करम विकला होती हैं। इन विकलाओं को, सत्रिभ ग्रह की क्रान्ति और शर की एक दिशा हो तो ग्रह में ऋण और भिन्न दिशा हो तो ग्रह में धन करना चाहिए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सूर्य सिद्धांत के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

सूर्य सिद्धांत के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें