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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 6 • श्लोक 8
शरदाने वैशिष्ट्यम्‌ नित्यशोडक॑स्य विक्षेपा: परिलेखे यथादिशम्‌ । विपरीता: शशाड्ूस्य तद्बशादथ मध्यमम्‌ ॥
सूर्य ग्रहण में शर का दान दिशा के क्रम से (अर्थात्‌ दक्षिण शर हो तो दक्षिण दिशा में उत्तर शर हो तो उत्तर दिशा में) करना चाहिए। चन्द्रग्रहण में इससे विपरीत शरदान होता है अर्थात्‌ दक्षिण शर हो तो उत्तर दिशा में, उत्तरशर हो तो दक्षिण दिशा में शर का दान करना चाहिए । चन्द्रग्रहण में मध्य ग्रहण कालिक वलन एवं शर दोनों की दक्षिण दिशा हो तो उत्तर चिहन से, उत्तर दिशा हो तो दक्षिण चिहन से, पूर्वाभिमुख मध्यग्रहण कालिक स्पष्टवलन का दान करना चाहिए।
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