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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 6 • श्लोक 7
ग्राह्मवृत्ते स्पर्शमोक्षयोज्ञनिम्‌ विक्षेपाग्रात्‌ पुनः सूत्र मध्यबिन्दुं प्रवेशयेत्‌ । तद्ग्राह्मबिन्दुसंस्पर्शाद्‌ ग्रासमोक्षौ विनिर्दिशेत्‌ ॥
मानैक्यार्धवृत्तस्थ शराग्र चिहनों से वृत्त के केन्द्रपर्यनत की गई रेखा और ग्राह्मगवृत्त की परिधि के सम्पात चिहनों पर स्पर्श और मोक्ष होता है। अर्थात्‌ स्पाशिकिशराग्र सूत्र एवं ग्राह्मबिम्ब के सम्पात बिन्दु पर स्पर्श, तथा मोक्षकालिक शणग्रसूत्र और ग्राह्मबिम्ब के सम्पात बिन्दु पर मोक्ष होता है।
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