ग्राह्य और ग्राहकबिम्ब के योगार्ध से अर्थात् मानैक्यखण्ड से समाससंज्ञक दूसरा वृत्त तथा ग्राह्मबिम्ब के व्यासार्ध से तीसरा ग्राह्म वृत्त का निर्माण करें।
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