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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 6 • श्लोक 3
परिलेख: प्रकार: ग्राह्म-ग्राह्म कयोगार्ध-सम्मितेन द्वितीयकम्‌ । मण्डल तत्समासाख्यं ग्राह्मार्थन तृतीयकम्‌ ॥
ग्राह्य और ग्राहकबिम्ब के योगार्ध से अर्थात्‌ मानैक्यखण्ड से समाससंज्ञक दूसरा वृत्त तथा ग्राह्मबिम्ब के व्यासार्ध से तीसरा ग्राह्म वृत्त का निर्माण करें।
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