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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 6 • श्लोक 23
ग्रहणे चन्द्रस्य वर्णज्ञानम्‌ अर्धादूने सधूम्र॑ स्यात्‌ कृष्णमर्धाधिके भवेत्‌ । विमुञ्चत: कृष्णताम्रं कपिल सकलग्रहे ॥
चन्द्रग्रहण में चन्द्रबिम्ब का आधे से अल्प ग्रास होने पर ग्रस्तभाग धूम्रवर्ण का, अर्धाधिक ग्रस्त होने पर ग्रस्तभाग कृष्णवर्ण का, मोक्षाभिमुख अर्थात्‌ पादोनबिम्ब से अधिक ग्रास होने पर कृष्णताम्रवर्ण तथा सम्पूर्ण ग्रहण होने पर कपिलवर्ण (हल्का पीत वर्ण) होता है। सूर्यग्रहण में सूर्य का ग्रास सदैव कृष्णवर्ण ही होता है।
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