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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 6 • श्लोक 22
एवमुन्मीलने मोक्ष दिड्मुखीं सम्प्रसारयेत्‌ । विलिखेन्मण्डल प्राग्वदुन्मीलनमथोक्‍क्तवत्‌ ॥
इसी प्रकार मध्यबिन्दु से मोक्षशराग्र की दिशा में मानान्तरार्ध तुल्य शलाका रखकर, शलाका और ग्राहकमार्ग के योगस्थान से ग्राहक बिम्ब व्यासार्ध से ग्राहकवृत्त बनायें। ग्राहकवृत्त और ग्राह्मवृत्त का जिस दिशा में जिस स्थान पर योग होगा उस स्थान से उस दिशा में उन्‍्मीलन आरम्भ होगा।
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