इसी केन्द्र से ग्राहक (छादक) विम्ब व्यासार्ध से खींचा गया वृत्त ग्राह्म (छाद्य) विम्ब को जहाँ स्पर्श करेगा वहीं सम्मीलन का आरम्भ स्थान होगा।
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