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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 6 • श्लोक 2
वलनवृत्तम्‌ सुसाधितायामवनौ बिन्दुं कृत्वा ततो लिखेत । सप्तवर्गाड्गुलेनादा मण्डल वलनाश्रितम्‌ ॥
संशोधित समतल भूमि में इष्टस्थान में बिन्दु निश्चित कर उस बिन्दु से ७ के वर्ग अर्थात्‌ ४९ अंगुल के व्यासार्ध से निर्मित प्रथम वृत्त वलनवृत्त होता है।
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