शलाका ग्राहकमार्ग को जहां स्पर्श करे उस बिन्दु को केन्द्र मानकर ग्राहक बिम्ब व्यासार्द्ध से वृत्त बनायें वह वृत्त ग्राह्मवृत्त के जितने भाग को काटेगा उतना भाग ग्राहक बिम्ब से आच्छादित होगा। अर्थात् उतना ग्रास इष्टकाल में होगा।
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