अर्थात् मध्यग्रास से पूर्व इष्टग्रास होने पर स्पर्शशराग्राभिमुखी और मध्यग्रास से पश्चात् इष्टग्रास होने पर मोक्षशराग्राभिमुखी शलाका अंकित करूनी चाहिये।
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