मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
सूर्य सिद्धांत • अध्याय 6 • श्लोक 16
तत्र सूत्रेण विलिखेच्चापं बिन्द॒त्रयस्पृशा । स पन्था ग्राहकस्योक्तो येनासौ सम्प्रयास्यति ।।
उस योगबिन्दु को केन्द्र मानकर स्पर्श, मध्य और मोक्षसंज्ञक बिन्दुओं को स्पर्श करते हुए व्यासार्धरूप सूत्र से जो चाप बनेगा वह चापात्मक ग्राहकमार्ग होगा। उस मार्ग से ग्राहक बिम्ब ग्राह्मबिम्ब के आच्छादन के छिये गमन करेगा।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सूर्य सिद्धांत के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

सूर्य सिद्धांत के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें