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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 6 • श्लोक 14
ग्रहणे छादक मार्गज्ञानम्‌ स्वसंज्ञितास्त्रय: कार्या विक्षेपाग्रेषु बिन्दव:। तत्रप्राइमध्ययोर्मध्ये तथा मौक्षिकमध्ययो: ॥
स्पर्श, मध्य और मोक्षकालिक शरगराग्रों पर क्रम से स्पर्श, मध्य और मोक्ष संज्ञक तीन बिन्दु कल्पना कर स्पर्श और मध्य तथा मध्य और मोक्ष संज्ञक बिन्दुओं से
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