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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 6 • श्लोक 12
परिलेखे दिग्व्यत्यास: छेद्यकं लिखता भूमौ फलके वा विपश्चिता । दिशां विपर्यय: कार्य: पूर्वापरकपालयो: ॥
समान भूमि में अथवा काष्ठादि से निर्मित पड़िका में छेद्यक बनाते समय गणक को पूर्वापरकपाल में दिशाओं का व्यतिक्रम करना चाहिये। अर्थात्‌ पूर्वकपाल में जिस प्रकार सव्यक्रम से पूर्वादि दिशाओं का अड्डून किया है उससे विपरीत क्रम से पशिमकपाल में करें।
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